Hindi Essay On Holi In Hindi Language

Short Essay on Holi in Hindi Language for Class 7, 8, 9

होली पर निबंध: होली भारत के सबसे मुख्य त्यौहारों में से एक है। होली रंगों का त्यौहार है जो फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है, रंगों के इस त्यौहार पर सभी लोग एक दूसरे को रंग लगाकर प्रेम भावना को बढ़ाते हैं। होली सारे दुःख और गम भूलकर आपसी मेल मिलाप को बढ़ावा देने वाला त्यौहार है। होली के दिन सभी लोग ईर्ष्या और दुश्मनी की भावना को भूलकर सौहार्द से एक दूसरे को गले लगाते हैं।

होली का त्यौहार सबसे ज्यादा खुशियां लेके आता है क्योंकि इस दिन हम सबसे ज्यादा हँसते हैं। लोगों के रंग से लिपे पुते चेहरे हर किसी को हंसने पर मजबूर कर देते हैं। होली का त्यौहार अब इतना प्रसिद्ध हो चुका है कि केवल भारत में ही नहीं बल्कि अब ये विदेशों में भी लोकप्रिय होता जा रहा है। भारत के अलावा अब कई देशों में लोग होली मनाने लगे हैं।

कैसे मानते हैं होली का त्यौहार: Short Essay on Holi in Hindi

होली का त्यौहार दो पक्षों में मनाया जाता है। पहले पक्ष में होलिका दहन होता है। होलिका दहन को मनाने के पीछे कई पौराणिक कथायें प्रचलित हैं। होलिका दहन में घरों के बाहर चौराहों पर लकड़ी, घासफूस और गोबर के उपलों को जलाते हैं। घर की महिलायें रीति गीत गाती हैं और सभी लोग एक दूसरे से गले मिलकर प्रेम प्रकट करते हैं।

दूसरे पक्ष में रंगों से होली खेली जाती है। रंग बिरंगे गुलाल, पिचकारियां और छोटे छोटे रंग भरे गुब्बारे होली की सुंदरता को बढ़ाते हैं। सभी लोग अपने सगे सम्बन्धियों के घर घर जाकर गुलाल लगाते हैं और एक दूसरे से गले मिलते हैं।

नन्हें मुन्ने बच्चों के लिए ये त्यौहार बहुत ही खास होता है क्योंकि इस दिन मस्ती करने और खेलने की पूरी छूट होती है। बच्चे एक दूसरे के चेहरे पर रंग लगाते हैं। पिचकारियों में रंग भरकर एक दूसरे पर चलाते हैं। आज कल बाजारों में एक से एक अच्छे डिजाइन की पिचकारियां मिलती हैं जो बच्चों को बहुत ही आकर्षित करती हैं।

फिर दोपहर को होली खेलने के बाद सभी लोग नहाते हैं और अपने चेहरे से रंग छुटाते हैं। घर की महिलायें पकवान बनाती हैं और नहा धोकर लोग पकवान खाते हैं। इस तरह पूरा दिन मस्ती करते बीतता है। होली पर पूरे भारत का रंग ही बदल जाता है।

क्यों मनाते हैं होली –

होली को मनाने के पीछे भक्त प्रह्लाद और राक्षसराज हिरण्यकश्यप की कहानी सबसे ज्यादा प्रचलित है।

भक्त प्रह्लाद की कहानी

Holika and Bhakt Prahlad Story

विष्णुपुराण की कथा के अनुसार, चारों ओर असुरों की शक्तियां बढ़ती जा रहीं थीं। असुरों का राजा हिरण्यकश्यप बहुत ही क्रूर शासक था। हिरण्यकश्यप नास्तिक था अर्थात वह ईश्वर को नहीं मानता था। हिरण्यकश्यप लोगों से खुद की पूजा करने को कहता था वह भगवान् विष्णु को अपना परम शत्रु मानता था।

हिरण्यकश्यप ने भगवान ब्रह्मा की तपस्या करके उनसे एक वरदान लिया था कि उसे कोई जीव जन्तु, नर या नारी, देवता या राक्षस कोई ना मार पाये और ना तो वह दिन में मरे, ना ही रात में, ना ही सुबह और ना ही शाम, ना ही घर के अंदर और ना ही बाहर, ना ही कोई शस्त्र उसे मार पाये।

ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त करने के बाद हिरण्यकश्यप खुद को अमर मान चुका था। वह सभी लोगों से अपनी ही पूजा करने को कहता था और सभी लोग उससे डरकर उसी की पूजा करते थे।

हिरण्यकश्यप जैसे नास्तिक राक्षस के यहाँ एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम “प्रह्लाद” रखा गया। प्रह्लाद पर श्री हरी अर्थात भगवान् विष्णु की कृपा थी। प्रह्लाद भगवान् विष्णु के परम भक्त थे। वह जहाँ भी जाते लोगों को श्री हरी की पूजा करने की बात कहते।

हिरण्यकश्यप को अपने पुत्र का विष्णु भक्त होना बिल्कुल पसंद नहीं था। उसने अपने पुत्र प्रह्लाद को समझाया कि मैं ही ईश्वर हूँ और मुझसे बढ़कर पूरे ब्रह्मांड में कोई शक्तिशाली नहीं है। लेकिन भक्त प्रह्लाद पर अपने पिता की बातों का कोई असर नहीं होता, उन्होंने कई बार अपने पिता को समझाने की कोशिश की कि पिताजी भगवान् विष्णु ही परम शक्तिशाली हैं उन्हीं की दया से हमारा जीवन चलता है और आपको भी श्री हरी की उपासना करनी चाहिये।

हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को कई बार समझाया लेकिन जब प्रह्लाद नहीं माने तो हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को जान से मारने के कई प्रयत्न किये। लेकिन भगवान् विष्णु हमेशा भक्त प्रह्लाद की रक्षा करते थे। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को हाथी के पैर से कुचलने की कोशिश की, पहाड़ से गिराकर मारने की कोशिश की पर श्री हरी के भक्त को आखिर कौन मार सकता है। भगवान् विष्णु हमेशा उनकी रक्षा करते थे।

हिरण्यकश्यप की एक बहन थी जिसका नाम होलिका था। होलिका के पास एक अदभुत चादर थी जिसे ओढ़ कर आग में भी बैठ जायें तो भी इंसान नहीं जलता था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका की मदद ली।

होलिका अपनी चादर ओढ़कर और प्रह्लाद को गोद में लेकर भयंकर आग में बैठ गयी। होलिका ने स्वयं चादर ओढ़ रखी थी ताकि वो ना जले लेकिन हवा के प्रवाह से वो चादर उड़कर प्रह्लाद के ऊपर आ गयी और प्रह्लाद आग में जलने से बच गये लेकिन होलिका धूं धूं करके जल गयी।

तभी से होली का पर्व मनाने की प्रथा प्रचलित हो गयी। इसलिए रंगों की होली मनाने से पहले होलिका दहन किया जाता है।

बाद ने विष्णु जी ने नरसिंह भगवान् का रूप धारण करके सांय के समय घर की चौखट पर बैठकर राक्षस हिरण्यकश्यप को मार डाला। भक्त प्रह्लाद की ये कथा आदिकाल से चली आ रही है।

कैसे मनायें सौहार्दपूर्ण होली –

होली खेलने के लिये लोग ज्यादातर रंगों का प्रयोग करते हैं। पुराने ज़माने में लोग प्राकर्तिक रंगों का प्रयोग करते थे जो आसानी से छूट जाते थे और हमारी त्वचा को किसी भी प्रकार का कोई नुक्सान नहीं पहुँचाते थे लेकिन आज कल बाजारों में केमिकल से बने हुए रंग मिलते हैं।

ये सभी रंग त्वचा के लिए तो हानिकारक तो हैं ही लेकिन अगर गलती से आखों में रंग चला जाये तो आँखों की रौशनी तक जा सकती है। इसलिए सभी लोगों से विनती है कि अच्छी क़्वालिटी के रंगों का इस्तेमाल करें।

गुलाल का इस्तेमाल करें और अगर कोई रंग नहीं लगवाना चाहता तो जबरदस्ती ना करें क्योंकि कई लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है उनको रंगों से एलर्जी हो सकती है।

होली से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

1. अकबर के ज़माने में भी खूब होली मनाई जाती थी। मुग़ल काल में महारानी जोधाबाई और अकबर के होली खेलने का वर्णन मिलता है

2. भारत में होली फाल्गुन के महीने में मनाई जाती है। होली का मानना ऋतुराज बसंत के आने का संकेत है

3. होली अकेला त्यौहार है जिसमें बच्चों को मस्ती करने की पूरी छूट होती है

4. शाहजहाँ के ज़माने में ईद-ए-गुलाबी नाम से होली मनाई जाती थी

5. होली अकेला ऐसा त्यौहार है जिसमें कोई किसी की जाति या धर्म नहीं देखता बस सभी होली की मस्ती में डूब जाते हैं

6. होली खेलने का सबसे अच्छा समय सुबह से दोपहर तक का होता है

7. रंगों की होली खेलने से एक दिन पहले होलिका जलाना एक विशेष परंपरा है।

तो मित्रों इस होली खूब खुशियाँ मनायें, अपने जीवन में भी सुखों के रंग घोल दें

हिंदीसोच की ओर से आप सभी को होली की बहुत बहुत शुभकामनायें….

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होली के त्योहार के बारे में अपने स्कूल जाने वाले बच्चों को एक आसान और साधारण निबंध या भाषण के द्वारा वर्णंन कीजिये। होली हमारे लिये सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्सव है जिसे हम सभी बेहद खुशी के साथ मनाते है। तो, चलिये अपने नन्हें-मुन्नों को इस बारे में जानकारी देते है।

होली पर निबंध (होली एस्से)

You can get here some essays on Holi in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, 400, and 500 words.

होली निबंध 1 (100 शब्द)

होली रंगों का त्योहार है जिसे हर साल फागुन के महीने में (मार्च) हिन्दू धर्म के लोग बड़ी धूमधाम से मनाते है। उत्साह से भरा ये त्योहार हमारे लिये एक दूसरे के प्रति स्नेह और निकटता लाती है। इसमें लोग आपस में मिलते है, गले लगते है और एक दूसरे को रंग और अबीर लगाते है। इस दौरान सभी मिलकर ढ़ोलक, हारमोनियम तथा करताल की धुन पर धार्मिक और फागुन गीत गाते है। इस दिन पर हमलोग खासतौर से बने गुजिया, पापड़, हलवा, पानी-पूरी तथा दही-बढ़े आदि खाते है। होली उत्सव के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है।

होली निबंध 2 (150 शब्द)

हिन्दूओं के द्वारा दिवाली की तरह ही होली भी व्यापक तौर पर मनाया जाने वाला त्योहार है। ये फागुन महीने में आता है जो वसंत ऋतु के फागुन महीने में आता है जिसे वसंत ऋतु की भी शुरुआत माना जाता है। हर साल होली को मनाने की वजह इसका इतिहास और महत्व भी है। बहुत साल पहले, हिरण्यकश्यप नाम के एक दुष्ट भाई की एक द्ष्ट बहन थी होलिका जो अपने भाई के पुत्र प्रह्लाद को अपने गोद में बिठा कर जलाना चाहती थी।

प्रह्लाद भगवान विष्णु के भक्त थे जिन्होंने होलिका के आग से प्रह्लाद को बचाया और उसी आग में होलिका को राख कर दिया। l तभी से हिन्दु धर्म के लोग शैतानी शक्ति के खिलाफ अच्छाई के विजय के रुप में हर साल होली का त्योहार मनाते है। रंगों के इस उत्सव में सभी एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर दिनभर होली का जश्न मनाते है।

होली निबंध 3 (200 शब्द)

होली रंगों का एक शानदार उत्सव है जो भारत में हिन्दु धर्म के लोग हर साल बड़ी धूमधाम से मनाते है। ये पर्व हर साल वसंत ऋतु के समय फागुन (मार्च) के महीने में आता है जो दिवाली की तरह सबसे ज्यादा खुशी देने वाला त्योहार है। ये हर साल चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाता है। इस दौरान पूरी प्रकृति और वातावरण बेहद सुंदर और रंगीन नजर आते है।

होली का ये उत्सव फागुन के अंतिम दिन होलिका दहन की शाम से शुरु होता है और अगला दिन रंगों में सराबोर होने के लिये होता है। बच्चे इस पर्व का बड़े उत्सुकता के साथ इंतजार करते है तथा आने से पहले ही रंग, पिचकारी, और गुब्बारे आदि की तैयारी में लग जाते है साथ ही सड़क के चौराहे पर लकड़ी, घास, और गोबर के ढ़ेर को जलाकर होलिका दहन की प्रथा को निभाते है।

सभी रात में एक जगह इकठ्ठा होकर लकड़ी, घास, और गोबर के ढ़ेर को जलाकर होलिका दहन की रिवाज को संपन्न करते है। इसमें महिलाऐं रीति से संबंधित गीत भी गाती है। इस दौरान सभी खुशनुमा माहौल में होते है और होली खेलने के लिये अगली सुबह का इंतजार करते है। इस दिन सभी लोग सामाजिक विभेद को भुलाकर एक-दूसरे पर रंगों की बौछार करते है साथ ही स्वादिष्ट पकवानों और मिठाईयाँ बाँटकर खुशी का इजहार करते है।


 

होली निबंध 4 (250 शब्द)

होली का उत्सव हर साल पूर्णं चन्द्रमा के दिन मार्च (फागुन) के महीने में मनाया जाता है। इसे एकता, प्यार, खुशी, सुख, और जीत का त्योहार के रुप मे भी जाना जाता है। हमलोग एक-दूसरे के साथ प्यार और खुशी जाहिर करने के लिये इस पर्व को चमकीले और आकर्षक रंगों से खेलते है। इसका अपना महत्व है साथ ही इसको मनाने के पाछे कई सारे कारण, कथाएं और आस्था भी है।

बहुत समय पहले, एक राजा हिरण्यकश्यप, उसकी बहन होलिका और उसका पुत्र प्रह्लाद थे। प्रह्लाद एक पावन आत्मा था जो भगवान विष्णु का भक्त था जबकि उसके पिता चाहते थे कि प्रह्लाद समेत सभी उसकी पूजा करें। लेकिन भक्त प्रह्लाद को ये गवाँरा नहीं था और वह सदा भगवान विष्णु की ही पूजा करता था। इससे नाराज होकर उसके पिता ने उसको आग से जलाकर मारने की योजना बनाई। उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे क्योंकि होलिका को भगवान से ये वरदान मिला था कि आग उसे जला नहीं सकता, अपने भाई की बात मान होलिका आग में बैठी परंतु प्रह्लाद को इस आग से कोई नुकसान नहीं हुआ बल्कि होलिका ही इस आग में जलकर खाक हो गई। इसी कथा से होली उत्सव का जन्म हुआ।

इस पर्व के मौके पर सभी अपने प्रियजनों से मिलते है, रंग और अबीर से होली खेलते है, साथ ही कई सारी क्रियाओं में भाग लेते है जो एक-दूसरे के लिये खुशी को प्रदर्शित करता है। इस तरह लोग रंगों के इस त्योहार में अपनों के संग खुशियाँ मनाते है।

होली निबंध 5 (300 शब्द)

सभी के लिये प्रिय होली खुशियाँ और सुख लाने वाला त्योहार होता है। ये हर साल हिन्दु धर्म के द्वारा मनाया जाने वाला बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व होता है। ये आमतौर पर मार्च के महीने में वसंत ऋतु की शुरुआत में आता है। सभी इसका बेसब्री से इंतजार करते है और इसको अलग तरीके से मनाने की तैयारी करते हैं।

होली को मनाने के पीछे भक्त प्रह्लाद की मुख्य भूमिका है। भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को उसी के पिता ने उसकी पूजा न करने पर मारने का प्रयास किया, इसके लिये उसने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठने को कहा क्योंकि होलिका को ये वरदान था कि वो आग में जल नहीं सकती चूंकि प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था इसलिये इस आग में उसे कोई नुकसान नहीं हुआ जबकि आशिर्वाद पायी होलिका जलकर भस्म हो गई। उसी दिन से हर साल ये त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के रुप में मनाया जाता है।

रंगों की होली के एक दिन पहले, लोग लकड़ी, घास और गोबर के ढ़ेर को रात में जलाकर होलिका दहन की पौराणिक कथा को याद करते है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन परिवार के सभी सदस्यों द्वारा सरसों उपटन का मसाज शरीर पर करवाने से शरीर और घर की गंदगी साफ हो जाती है और घर में खुशियाँ और सकारात्मक शक्तियों का प्रवेश होता है।

होलिका दहन के अगले दिन सभी लोग अपने मित्र, परिवार और सगे-संबंधियों के साथ रंगों से खेलते है। इस दिन बच्चे गुब्बारों और पिचकारियों में रंग भरकर दूसरों पर फेंकते है। सभी एक-दूसरे के घर जाकर गले लगाते है साथ ही अबीर लगाकर अपनत्व और प्यार का इजहार करते है। इस खास अवसर पर सभी अपने घर में मिठाई, दही-बढ़े, नमकीन, पापड़ आदि बनवाते है।


 

होली निबंध 6 (400 शब्द)

होली एक रंगों से भरा और महत्वपूर्ण उत्सव है भारत में। इसे हर साल हिन्दु धर्म के लोगों द्वारा मार्च (फागुन) महीने के पूर्णिंमा या पूर्णमासी के दिन मनाया जाता है। लोग इस पर्व का इंतजार बड़ी उत्सुकतापूर्वक करते है और उस दिन इसे लजीज पकवानों और रंगों के साथ मनाते है। बच्चे अल-सुबह ही रंगों और पिचकारियों के साथ अपने दोस्तों के बीच पहुँच जाते है और दूसरी तरफ घर की महिलाएं मेहमानों के स्वागत और इस दिन को और खास मनाने के लिये चिप्स, पापड़, नमकीन और मिठाईयों आदि बनाती है।

होली एक खुशी और सौभाग्य का उत्सव है जो सभी के जीवन में वास्तविक रंग और आनंद लाता है। रंगों के माध्यम से सभी के बीच की दूरीयाँ मिट जाती है। इस महत्वपूर्णं उत्सव को मनाने के पीछे प्रह्लाद और उसकी बुआ होलिका से संबंधित एक पौराणिक कहानी है। काफी समय पहले एक असुर राजा था हिरण्यकश्यप। वो प्रह्लाद का पिता और होलिका का भाई था। उसे ये वरदान मिला था कि उसे कोई इंसान या जानवर मार नहीं सकता, ना ही किसी अस्त्र या शस्त्र से, न घर के बाहर न अंदर, न दिन न रात में। इस असीम शक्ति की वजह से हिरण्यकश्यप घमंडी हो गया था और भगवान के बजाए खुद को भगवान समझता था साथ ही अपने पुत्र सहित सभी को अपनी पूजा करने का निर्देश देता था।

क्योंकि हर तरफ उसका खौफ था, इससे सभी उसकी पूजा करने लगे सिवाय प्रह्लाद के क्योंकि वो भगवान विष्णु का भक्त था। पुत्र प्रह्लाद के इस बर्ताव से चिढ़ कर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन के साथ मिलकर उसे मारने की योजना बनायी। उसने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठने का आदेश दिया। आग से न जलने का वरदान पाने वाली होलिका भस्म हो गई वहीं दूसरी ओर भक्त प्रह्लाद को अग्नि देव ने छुआ तक नहीं। उसी समय से हिन्दु धर्म के लोगों द्वारा होलिका के नाम पर होली उत्सव की शुरुआत हुई। इसे हम सभी बुराई पर अच्छाई की जीत के रुप में भी देखते है। रंग-बिरंगी होली के एक दिन पहले लोग लकड़ी, घास-फूस, और गाय के गोबर के ढ़ेर में अपनी सारी बुराईयों को होलिका के साथ जलाकर खाक कर देते है।

सभी इस उत्सव को गीत-संगीत, खुशबुदार पकवानों और रंगों में सराबोर होकर मनाते है। इस दिन सभी स्कूल, कॉलेज, विशवविद्यालय, कार्यालय, बैंक और दूसरे सभी संस्थान बंद रहते है जिससे लोग इस खास पर्व को एक-दूसरे के साथ मना सके।


 

होली निबंध 7 (500 शब्द)

होली रंगों का एक प्रसिद्ध त्योहार है जो हर साल फागुन के महीने में भारत के लोगों द्वारा बड़ी खुशी के साथ मनाया जाता है। ये ढ़ेर सारी मस्ती और खिलवाड़ का त्योहार है खास तौर से बच्चों के लिये जो होली के एक हफ्ते पहले और बाद तक रंगों की मस्ती में डूबे रहते है। हिन्दु धर्म के लोगों द्वारा इसे पूरे भारतवर्ष में मार्च के महीने में मनाया जाता है खासतौर से उत्तर भारत में।

सालों से भारत में होली मनाने के पीछे कई सारी कहानीयाँ और पौराणिक कथाएं है। इस उत्सव का अपना महत्व है, हिन्दु मान्यतों के अनुसार होली का पर्व बहुत समय पहले प्राचीन काल से मनाया जा रहा है जब होलिका अपने भाई के पुत्र को मारने के लिये आग में लेकर बैठी और खुद ही जल गई। उस समय एक राजा था हिरण्यकशयप जिसका पुत्र प्रह्लाद था और वो उसको मारना चाहता था क्योंकि वो उसकी पूजा के बजाय भगवान विष्णु की भक्ती करता था। इसी वजह से हिरण्यकशयप ने होलिका को प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठने को कहा जिसमें भक्त प्रह्लाद तो बच गये लेकिन होलिका मारी गई।

जबकि, उसकी ये योजना भी असफल हो गई, क्योंकि वो भगवान विष्णु का भक्त था इसलिये प्रभु ने उसकी रक्षा की। षड़यंत्र में होलिका की मृत्यु हुई और प्रह्लाद बच गया। उसी समय से हिन्दु धर्म के लोग इस त्योहार को मना रहे है। होली से ठीक एक दिन पहले होलिका दहन होता है जिसमें लकड़ी, घास और गाय के गोबर से बने ढ़ेर में इंसान अपने आप की बुराई भी इस आग में जलाता है। होलिका दहन के दौरान सभी इसके चारों ओर घूमकर अपने अच्छे स्वास्थय और यश की कामना करते है साथ ही अपने सभी बुराई को इसमें भस्म करते है। इस पर्व में ऐसी मान्यता भी है कि सरसों से शरीर पर मसाज करने पर उसके सारे रोग और बुराई दूर हो जाती है साथ ही साल भर तक सेहत दुरुस्त रहती है।

होलिका दहन की अगली सुबह के बाद, लोग रंग-बिरंगी होली को एक साथ मनाने के लिये एक जगह इकठ्ठा हो जाते है। इसकी तैयारी इसके आने से एक हफ्ते पहले ही शुरु हो जाती है, फिर क्या बच्चे और क्या बड़े सभी बेसब्री से इसका इंतजार करते है और इसके लिये ढ़ेर सारी खरीदारी करते। यहाँ तक कि वो एक हफ्ते पहले से ही अपने दोस्तों, पड़ोसियों और प्रियजनों के साथ पिचकारी और रंग भरे गुब्बारों से खेलना शुरु कर देते। इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग गुलाल लगाते साथ ही मजेदार पकवानों का आनंद लेते।

 

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